
Sattuz Founder Story: अगर आप भारत से हैं तो आप लोगों ने सत्तू नाम का यह शब्द सुना होगा यह एक तरह की डिश है जो खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक आहार से भरपूर होती है इसलिए लोग बीमार व्यक्ति को इसे खाने की सलाह देते हैं। भारत के कुछ विशेष राज्यों में ही इसे बनाया जाता है और लोगों के द्वारा खाया भी जाता है। लेकिन एक बिहारी लड़के ने अपने इस देसी डिश को एक ब्रांड के रूप में खड़ा कर दिया। जी हम बात कर रहे हैं सचिन कुमार की। जो सत्तूज नाम की कंपनी के फाउंडर हैं।
इस आर्टिकल में हम आपको सचिन कुमार की सफलता की कहानी (Sattuz Founder Story) के बारे में बताने वाले हैं क्योंकि अक्सर लोग होते हैं जो अपना बिजनेस शुरू तो करना चाहते हैं लेकिन और मैं आने वाली परेशानियों की दर से अपना पैर पीछे की ओर खींच लेते हैं या फिर कई लोग एक आइडिया की कमी के कारण अपनी किस्मत को बिजनेस में आजमा ही नहीं पाते हैं। तो आईए जानते हैं ऐसे एक बिहार के सफल व्यक्ति की कहानी !
Sattuz Founder Story
अगर आप बिहार की है तो आप लोगों ने सत्तूज को जरूर खाया होगा। यह एक तरीके से पौष्टिक आहार है जो सुपर फूड के अंतर्गत आता है। भारत में कई सालों से ऐसे खाया जाता है। इसे खाने के बाद लोग अपने आप को स्वस्थ महसूस भी करते हैं और पौष्टिक आहार से भरपूर इस मिक्सचर को एक लड़के ने किस प्रकार स्टार्टअप के तौर पर खड़ा कर दिया है। इस लड़के का नाम सचिन कुमार है जिन्होंने अपनी देसी इंडियन डिस्को मार्केट में एक नई पहचान दिलाई है जिसकी वह हकदार है। आज के समय में इस कंपनी की कीमत करोड़ों रुपए में है।
सचिन कुमार की शुरुआत
कुछ रिपोर्ट में सचिन कुमार बताते हैं कि उन्हें शुरुआत से ही अपनी मातृभूमि के साथ जुड़े रहने के अलावा यहीं से अपने बिजनेस की शुरुआत करने का मन था। हालांकि शुरुआती समय में यह मुंबई में बिजनेस डेवलपमेंट के तौर पर काम करते थे इस दौरान इवेंट के जरिए कई सारे बड़े लोगों से उनकी मुलाकात होती थी। एक बार जब साल 2008 की बात है, इन्होंने सेल्स और मार्केटिंग में एमबीए की डिग्री हासिल की।
इसके बाद उन्होंने नौकरी ज्वाइन की लेकिन कुछ दिनों के बाद अपना बिजनेस सेटअप करने के लिए साल 2009 में आकर अपनी नौकरी से रिजाइन कर दिया। अपने बिजनेस को सेटअप करने के लिए इन्होंने कई लोगों से बात की लेकिन इन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर इनका साथ देने के लिए बिल्कुल भी नहीं ठानी ! इसके बाद यह अपने देसी फूड सत्तूज से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए अपने शहर मधुबनी बिहार में वापस आ जाते हैं।
नौकरी छोड़कर फैमिली बिजनेस को किया ज्वाइन
शुरुआत में उनके माता-पिता ने भी इन्हें एक अच्छी खासी पैसे वाली नौकरी छोड़कर बिहार वापस आने कि इस फैसले को गलत बताया। लेकिन उनकी मेहनत और लगन की वजह से यह अपने परिवार के साथ कंज्यूमर ड्यूरेबल व्यवसाय में शामिल हो चुके थे। इसके बाद उनकी शादी एक ऋचा नाम की लड़की से होती है। इसके बाद इन्होंने अपने व्यवसाय को बड़ा करने के लिए खाद्य पदार्थों पर रिसर्च करना शुरू कर दिया तो इन्हें पता लगा कि उनके शहर में मखाना और सत्तू नाम के दो ऐसे प्रोडक्ट है जो सुपर फूड के नाम से जाने जाते हैं।
फिर आया नया बिजनेस आईडिया
इन्होंने सुपर फूड के मामले में मखाना और सत्तू पर रिसर्च करने के बाद पता लगा कि मखाना की अच्छी खासी पैकिंग है. मार्केट में दूसरे और कई सारी कंपनी है जो इस पर काम कर रही है लेकिन सत्तू नाम के इस प्रोडक्ट पर दूसरी कंपनी बिल्कुल भी काम नहीं कर रही। ना तो इसकी मार्केटिंग अच्छी सी की जाती है और ना ही इस पर लोग अच्छे से कम कर रहे हैं |
इसी का फायदा उठाते हुए इन्होंने भारत के आने के राज्यों में फेमस सत्तू नाम के इस सुपर फूड को दुनिया की नजरों में अपनी पहचान दिलाई। अपनी रिसर्च पूरी करने के बाद उन्होंने साल 2018 में सत्तूज नाम के प्रोडक्ट को मार्केट में लॉन्च किया। शुरुआत में इन्होंने इसके लिए तीन फ्लेवर सिलेक्ट किए थे जिसमें स्वीट, जलजीरा और चॉकलेट भी शामिल था ।
धीरे-धीरे इन्होंने अपने इस बिजनेस को स्केल करना शुरू कर दिया और आज के समय में इंडियन एंजल नेटवर्क से भी इसको फंड मिल चुका है। कोरोना कल के तौर पर इस कंपनी को एक नई ग्रोथ मिली। भारत के दूसरे कई शहरों में भी हेल्दी खाने के लिए कारखाने स्थापित कर दिए हैं। आज के समय में करीब उनकी कंपनी की वैल्यूएशन 2019 में के अनुसार 2.44 करोड रुपए (अनुमानित) है।

मेरा नाम विशाल ओझा है. मैने Mathematics से B.sc किया हुआ है। मुझे विज्ञान की अच्छी जानकारी है। इसके अलावा में बिजनेस, मौसम या टेक्नोलॉजी का ज्ञान रखता हूं। इंशॉर्टखबर पर इसी फील्ड में योगदान दे रहा हूं।