
Hindu Dharma Riti Riwaj: हिंदू धर्म में जब भी शादी होती है, तो शादी में दुल्हन विदाई के समय पीछे की तरफ चावल क्यों करती है? कभी आपने इसका कारण जानने की कोशिश की है ? अगर नहीं तो आज का यह लेख आपके लिए ही है। कहां जाता है की सनातन धर्म एक वैज्ञानिक धर्म है। जहां पर किए जाने वाले हर कार्य के पीछे वैज्ञानिक मकसद होता है। अभी हिंदू धर्म में शादियों के सीजन चल रहा है देवठान के बाद यह सीजन चालू हो जाता है।
इस दौरान हमारे धर्म में कई सारे रीति रिवाज होते हैं जो शादियों के दौरान किए जाते हैं. जैसे दूल्हा दुल्हन की शादी की रश्म, संगीत विदाई, वरमाला और सात फेरे. लेकिन इसमें एक एक रस्म यह भी है कि शादी हो जाने के बाद जब विदाई का समय आता है, तो दुल्हन के द्वारा चावल पीछे की तरफ फेक जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे एक बहुत बड़ा और विशेष कारण भी है। इसके बारे में इस लेख में आपको जानने को मिलने वाला है।
शादी में दुल्हन विदाई के समय पीछे की तरफ चावल क्यों फेंकती है ?
हिंदू धर्म में दुल्हन की शादी हो जाने के बाद विदाई की रश्म की जाती है. इसी रश्मि के दौरान दुल्हन अपने पीछे की और थाली में से चावल लेकर फेंकती है इस चावल को दुल्हन के पीछे खड़ी हुई महिलाओं के द्वारा खेला जाता है जो चावल नीचे गिर जाता है उनको बाद में उठा लिया जाता है। इसके पीछे एक खास वजह यह है कि घर की बेटियों को लक्ष्मी का रूप माना गया है |
इससे सुख समृद्धि भी आती है और साथ में जब तक घर की बेटी घर में रहती है, कुबेर का खजाना अपने पास रहता है। लेकिन जब घर की बेटी की विदाई होकर इसके दूसरे घर में जाती है तो ऐसे में चावल को पीछे इसलिए फेंका जाता है । क्योंकि इसके पीछे मान्यता यह है कि घर की बेटी अपने मायके के लिए धन संपदा की कई कमी ना हो. उसका मायका हमेशा खुशियों से भरपूर रहे।
उसके इस घर से विदा हो जाने के बाद भी घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहे। ऐसी कामना घर की लक्ष्मी बेटी के द्वारा विदाई के समय चावल को पीछे फेंकने के रुपए की जाती है। चावल हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनाज माना जाता है इसे हर प्रकार के अनुष्ठान पूजा कार्यक्रम में भी शामिल किया जाता है क्योंकि चावल को सनातन धर्म में धन का प्रतीक माना गया है।
कैसे की जाती है चावल पीछे फेंकने की रस्म?
किसी पूजा अनुष्ठान या शादी के समय रश्म को करने का एक अलग ही विधि विधान होता है. ऐसा माना जाता है कि चावल को पीछे फेंकने की रस्म को बड़े ही सावधानी और महत्व के साथ किया जाता है। क्योंकि यह पल घर के सभी सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण होता है लगभग सभी लोग अपने घर की बेटी विदाई के वक्त रोने लगते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस रस्म को करने के लिए दहलीज पर दुल्हन की बहन, सहेली या कोई दूसरी महिला चावल की थाली लेकर आगे की तरफ खड़ी होती है और पीछे की साइड घर परिवार के सभी सदस्य से होते हैं।
यह अभी सदस्य दिल्ली के अंदर ही मौजूद रहते हैं। जब दुल्हन घर से बाहर निकलती है तो उसे थाली में से चावल के दानों को दोनों हाथों से मुट्ठी भरने के बाद पीछे की तरफ बिना देखे फेंका जाता है। इस दौरान दुल्हन की मां और अन्य महिलाएं चावल को अपने पल्लू फैला कर समेटने की कोशिश करती है। इन चावल के दोनों को हमेशा संभाल कर भी रखा जाता है। जिसमें बेटी की कामना होती है कि उसके घर में कभी अनाज की कमी नहीं हो और सुख समृद्धि धन-धान्य की कभी-कभी नहीं हो।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई समस्त जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोगों के अनुसार डीटेल्स जानकारी करने के आधार पर बनाई गई है। इसमें इंशॉर्ट खबर की टीम के द्वारा किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या एडिट अपनी तरफ से नहीं किया गया है। इसके अलावा कुछ जानकारी इंटरनेट के माध्यम से भी प्राप्त की गई है।

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