गोरखनाथ मंदिर में क्या सच में भगवान शिव के अवतार के प्रतिमा है?

गोरखनाथ मंदिर
गोरखनाथ मंदिर
WhatsApp Icon Join our WhatsApp Group

नई दिल्ली । पौराणिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश एक प्रमुख राज्य है और उत्तर प्रदेश का गोरखपुर शहर और इसमें स्थित गोरखनाथ मंदिर भी उसमें से एक है। ‌ हालांकि पहले के समय में उत्तर प्रदेश में अयोध्या में भगवान श्री राम के द्वारा जन्म लिया गया था , तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश का गोरखपुर शहर में भगवान शिव के अवतार के रूप में एक शख्सियत ने जन्म लिया था इसके बारे में भी जाने वाले हैं। अगर आप भी गोरखपुर मंदिर की महिमा और इससे संबंधित कुछ प्रश्नों के उत्तर जानना चाहते हैं तो एकदम सही खबर पढ़ रहे हैं।

कहां है गोरखपुर मंदिर?

सनातन दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना जाता है ऐसे में उत्तर प्रदेश के शहर गोरखपुर में गोरखपुर मंदिर स्थित है। ‌ इस मंदिर में बाबा गोरखनाथ की प्रतिमा लगी हुई है इस मंदिर के वर्तमान में महंत अभी योगी आदित्यनाथ जी हैं जो महंत होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं । इतना ही नहीं योगी आदित्यनाथ जी को हर राज्य के लोग बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ‌

अगर आप भी उत्तर प्रदेश में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप लोगों को गोरखपुर शहर जाकर गोरखपुर मंदिर अवश्य जाना चाहिए ।‌ क्योंकि यह मंदिर पौराणिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। ‌ यहां पर संस्कृति की एक झलक आपको देखने के लिए मिलती है। जो ऋषि मुनि साधना करते हैं, उनके लिए भी यह विशेषता है इसलिए ताकत आपको बता दे कि इस मंदिर की खास बात यह है कि मुगलपुर कालीन इतिहास से भी संबंधित यह मंदिर जहां पर लोगों को साधना सिखाई जाती है।

गोरखनाथ मंदिर में किसकी मूर्ति है?

गोरखपुर शहर का नाम अपने आप नहीं पड़ा है. बल्कि इस शहर को ऋषि गोरखनाथ के नाम पर जाना जाता है जो की एक बहुत बड़े सिद्ध ऋषि हुआ करते थे. इतना ही नहीं ऐसा माना जाता है कि शास्त्रों के अनुसार गोरखनाथ हर युग में जन्म लेते हैं उन्होंने द्वापर युग, त्रेता युग में भी अवतार लिया था. भगवान शिव के अवतार के रूप में गोरखनाथ मंदिर में गोरखपुर ऋषि की पूजा की जाती है। ‌ अगर आप साधना सीखना चाहते हैं तो यह आपके लिए एक अच्छा केंद्र होने वाला है जिसके महंत योगी आदित्यनाथ जी हैं। ‌ हिंदू धर्म दर्शन और आध्यात्मिक की दृष्टि से यह एक प्रमुख केंद्र भी है।

क्यों है गोरखनाथ मंदिर की प्रसिद्ध?

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर का नाम ऋषि गोरखनाथ जी के नाम पर ही इसलिए रखा गया है . क्योंकि उन्होंने इसी मंदिर के स्थान पर अपनी समाधि ली थी. हिंदू शास्त्रों के अनुसार गोरखनाथ जी ने इसी दिव्य स्थान पर समाधि रहने के बाद यहां पर गुरु गोरखनाथ जी का मंदिर बनवाया गया था जो की काफी प्रसिद्ध हो चुका है पौराणिक काल से ही है मंदिर अपने आप में बहुत ज्यादा इतिहास समेटे हुए हैं इतना ही नहीं मुगलकालीन इतिहास से भी संबंधित है।

ऐसा माना जाता है कि मुगलकालीन राजाओं ने इस मंदिर को तुड़वाने के लिए अपनी एड़ी से चोटी का जोर लगा दिया था। उन्होंने कई बार कोशिश की थी कि वह गोरखनाथ मंदिर को तोड़कर अपनी महत्वता बनाएं। ‌ मुगलकालीन इतिहास के प्रारंभिक चरण में इस मंदिर की कीर्ति चारों दिशाओं में पूरे एशिया में फैल रही थी। ‌ जिसके फल स्वरुप द्वितीय चरण के दौरान एक गोरखनाथ मंदिर को एक बार फिर से नवनिर्मित किया गया था। ‌

मुगलों ने तोड़ा गोरखनाथ मंदिर को

करीब 52 एकड़ में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में गोरखनाथ मंदिर फैला हुआ है. इतिहास बताता है कि इस मंदिर को तोड़ने के लिए मुगल कालीन इतिहास में कई सारे प्रयास किए गए इतना ही नहीं, इसको कई बार तोड़ भी दिया गया लेकिन बाद में इस मंदिर का नवनिर्माण किया गया जिसकी वजह गलत आज भी यह मंदिर कीर्ति का केंद्र बना हुआ है. यहां पर सिखाई जाने वाली साधना ध्यान केंद्र का एक प्रमुख कार्य है जिसकी कीर्ति से पूरा एशिया प्रभावित हो रहा था। ‌ यह बात मुगलों से चैन नहीं होती थी और वह इस मंदिर को तोड़ने के लिए सनातन संस्कृति को खत्म करने के लिए हर एक प्रयास करते रहते थे।