Manusmriti: हिंदू धर्म में क्या दूसरे धर्म में शादी करना सही माना जाता है या नहीं?

Manusmriti हिंदू धर्म में क्या दूसरे धर्म में शादी करना सही माना जाता है या नहीं
Manusmriti हिंदू धर्म में क्या दूसरे धर्म में शादी करना सही माना जाता है या नहीं
WhatsApp Icon Join our WhatsApp Group

Manusmriti: मनुस्मृति सनातन धर्म का एक बहुत ही पुराना और लोकप्रिय ग्रंथ कहा जाता है इसको लोग इसलिए पढ़ना पसंद करते हैं क्योंकि इसमें सनातन धर्म के संबंध में कई सारी बातें लिखी होती है कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं? ऐसी स्थिति धर्म में अगर कोई महिला या पुरुष किसी दूसरे धर्म की महिला पुरुष स्त्री से शादी करना चाहता है तो मनुस्मृति इस पर क्या कहता है इसके बारे में जानकारी हम आपको कृपया देने वाले हैं और साथ ही विद्वान का क्या मानना है. इसके बारे में भी आप लोगों को इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं.

Manusmriti: हिंदू धर्म में क्या दूसरे धर्म में शादी करना सही माना जाता है या नहीं?

अगर धर्म की जानकार अर्थात विद्वानों की माने तो हिंदू धर्म में वैसे तो देखा जाए तो किसी दूसरे धर्म के बारे में चर्चा ही नहीं की जाती है क्योंकि दुनिया का सबसे पहला धर्म हिंदू धर्म है और इस धर्म की उत्पत्ति से पहले ही भारत में किसी अन्य धर्म मौजूद ही नहीं था ऐसा हमारे ग्रंथो में बताया जाता है. उसके बाद जितने भी धर्म आए हैं सभी संप्रदाय और पंतो के रूप में विस्तार हुए हैं.

तो इसको लेकर धर्मवीर जाने का और का यह मानना है कि किसी भी सनातन धर्म की लड़का या लड़कियों को अपना धर्म छोड़कर अन्य धर्म के लोगों के साथ बिल्कुल भी विवाह नहीं करना चाहिए. मनुस्मृति में भी इसको लेकर जानकारी दी जाती है. न्यूज़ नेशन की रिपोर्ट के अनुसार मनुस्मृति ग्रंथ में अंतर जाति विवाह और अंतर धार्मिक को लेकर जानकारी दी गई है. मनुस्मृति के कुछ लोगों में कहां गया कि मनुष्य को कभी भी अपना धर्म बदलकर अन्य धर्म और संप्रदाय के लोगों के साथ संबंध अर्थात विवाह नहीं करना चाहिए.

अंतर्जातीय विवाह को लेकर स्टेटमेंट

जबकि मनुस्मृति धार्मिक ग्रंथ के श्लोक 3.14 के अंतर्गत अंतरजातीय विवाह को लेकर बात कही जाती है. अर्थात जो लोग एक ही जाति में विवाह करते हैं, ऐसे लोगों को मनुस्मृति सपोर्ट करती है. जबकि जो लोग अन्य जाति में विवाह कर लेते हैं । इसके लिए मनुस्मृति के अंतर्गत इसके लिए मना की जाती है. अगर कोई विद्वान व्यक्ति किसी शुद्र और नीच जाति की स्त्री से विवाह करता है, तो उसके वंश में गिरावट आने लगती है. किस प्रकार जन्म लेने वाला बच्चा भी नीच‌ जाति का ही माना जाता है। किसी क्षत्रिय व्यक्ति को भी नीच जाति के स्त्री के साथ विवाह नहीं करना चाहिए. इसके संबंध में जानकारी मनुस्मृति के 10.4 श्लोक के अंतर्गत मिलती है.

क्या कहते हैं विद्वान?

कुछ धार्मिक विद्वानों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म में विवाह कर सकता है. विचारधारा को आर्य समाज और राधा कृष्ण मिशन जैसे संप्रदाय सपोर्ट कर रहे हैं. आज के लोगों की विचारधारा के अनुसार किसी अन्य धर्म या अन्य जाति में विवाह करना गलत नहीं है. लेकिन धार्मिक ग्रंथ मनुस्मृति के अनुसार किसी भी महिला या पुरुष को अन्य धर्म के लोगों के साथ संबंध नहीं बनना चाहिए. वैसे आपकी इस पर क्या राय है यह हमें अवश्य बताएं.