Trimbakeshwar Jyotirlinga: त्रिदेवता की पूजा एक साथ होती है इस मंदिर में, औरंगजेब से है संबंध

Trimbakeshwar Jyotirlinga
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Trimbakeshwar Jyotirlinga: आज हम आपको यह कैसे मंदिर के बारे में बताने वाले जिसका महत्व सनातन संस्कृति में बहुत ही अधिक है इतना ही नहीं इस 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है जी हां हम त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में बताने जा रहे हैं. सनातन संस्कृति में हिंदुओं के लिए एक बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है और इसका संबंध मुगल काल में आने वाले राजा औरंगजेब से भी संबंधित है. आईए जानते हैं इस मंदिर की डिटेल्स के बारे में.

Trimbakeshwar Jyotirlinga

और इस मंदिर की बात करें तो यह मंदिर महाराष्ट्र के त्रांबकम् शहर में स्थित है. जो की एक पवित्र हिंदू मंदिर होने के साथ-साथ 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है. 12 ज्योतिर्लिंग यात्राओं की दृष्टि से अलग-अलग भारत के हिस्से में मंदिर मौजूद है. अगर कोई व्यक्ति अपनी जीते जी उनकी यात्रा कर देता है तो उसका जीवन सफल हो जाता है ऐसा माना जाता है. अगर आप भी इस त्रयंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग के बारे में जानना चाहते हैं तो आपको बता दें कि यह द्रविड़ शैली में बना हुआ मंदिर है.

इस मंदिर कोलकाता साड़ी मानता है इसके अलावा आपको बताने की है महाराष्ट्र के नासिक शहर के एयरपोर्ट से लगा 30 किलोमीटर दूरी पर एक गांव में स्थित है. जहां पर लाखों श्रद्धालु आकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन करते हैं. इस मंदिर की खास बात यह है कि यह मंदिर गोदावरी के धरती पर आने की कहानी से जुड़ा हुआ है. इसके अलावा इस मंदिर में ब्रह्मा विष्णु महेश यानी के तीनों की पूजा कि जाती है इसलिए इस मंदिर का नाम त्रंबकेश्वर मंदिर रखा गया है.

त्रंबकेश्वर मंदिर जाने का रास्ता

यह मंदिर द्रविड़ शैली में बना हुआ है इस मंदिर पर जाने के रास्ता यह है कि महाराष्ट्र नासिक जिले के अंतर्गत यह मंदिर आता है. इसके बाद नासिक एयरपोर्ट से 30 किलोमीटर की दूरी पर अगर आप चाहते हैं तो वहां पर आप लोगों को त्रय बक नामक गांव मिलता है. इस गांव में यह मंदिर स्थित है जहां पर तीनों देवताओं की पूजा की जाती है। ‌ यह धीरो देवता सनातन धर्म में रीड की हड्डी के रूप में जाने जाते हैं और इनकी पूजा का विशेष महत्व है.

गोदावरी नदी की धरती पर आने से भी संबंधित इस त्रंबकेश्वर मंदिर इतिहास जुड़ा हुआ है. जब आप इस मंदिर में तीन देवताओं के दर्शन करने के लिए जाते हैं तो आप लोग देखेंगे कि बड़ा दरवाजा और स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण यहां पर देखने के लिए मिलता है. इस मंत्र को पूरी डेविड शैली में बनाया गया है और पत्थरों पर इस प्रकार की नकाशी की गई की आज के इंजीनियर के आगे फेल हो जाते हैं. तो पौराणिक समय में इतनी टेक्नोलॉजी ना होने के बावजूद भी कैसे आखिर इतनी सटीक कला की जा सकती है?

मुगल इतिहास से संबंध

जैसा कि हमने आपको बताया कि मुगलों का इस भारत पर आता आक्रमण करना यह सब कुछ साधन संस्कृति को मिटाने के लिए किया गया था. और भारत के मंदिर उसकी प्रतीक के रूप में जाने जाते हैं इसलिए सबसे पहले मुगलों ने विशेष कर औरंगजेब ने भारत के मंदिरों को तोड़ने का निर्णय लिया. इसलिए उन्होंने आक्रमण इस अद्भूतेष शपथ कल वाले मंदिर त्रंबकेश्वर पर भी किया था.

1755 से लेकर 1776 के बीच यह मंदिर श्रीमंत नाना साहब पेशवा के द्वारा बनवाया गया था. लेकिन इस पर महाभारत काल से भी संबंध कुछ रतन देखने के लिए मिलते हैं जो कि इस मंदिर के ऊपर लगे हुए हैं. औरंगजेब ने इस मंदिर पर हमला इसलिए किया था क्योंकि पहले तरफ तो सनातन धर्म को मिटाना चाहता था, दूसरी तरफ इस मंदिर में मौजूद रन और पवित्र वस्तुओं को ध्वस्त करना इसका मुख्य मकसद था.