दुर्गा सप्तशती का पाठ के समय करना चाहिए ? क्या कहता है शास्त्र ?

दुर्गा सप्तशती का पाठ के समय करना चाहिए ?
दुर्गा सप्तशती का पाठ के समय करना चाहिए ?
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अगर आप भी इंटरनेट सर्च कर रहे हैं कि दुर्गा सप्तशती का पाठ के समय करना चाहिए? तो हम आपको बता दे कि वैसे तो आप लोग इस पाठ को सुबह के समय करते हैं तो आपके लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक रहता है। क्योंकि यह समय बहुत ही अच्छा माना जाता है हालांकि अगर राहुकाल होता है तो उसे समय आप लोगों को दुर्गा सप्तशती का पाठ बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। अगर आप भी इंटरनेट पर यही सच कर रहे हैं तो आपके संपूर्ण विस्तार से जानकारी इस आर्टिकल में दी जा रही है।

दुर्गा सप्तशती का पाठ के समय करना चाहिए ?

दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए मुहूर्त के हिसाब से आप लोगों को यह काम करना चाहिए वैसे तो बता दें कि अगर आप हर रोज इस पाठ को करते हैं तो इसके लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है। ‌ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर आप दुर्गा माता सप्तशती की पूजा पाठ अर्चना कर सकते हैं। ‌ ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत 4:00 बजे से होती है जो की 5:30 बजे तक रहता है।

इस बीच स्नान करके आप लोग सुबह अच्छे वस्त्र पहनने के साथ-साथ विधिवत पूजा पाठ कर सकते हैं। ऐसा ही माना जाता है कि जो व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है उसके सारे कष्ट माताजी दूर कर देती हैं उसके जीवन में हमेशा अलौकिक खुशियों का आवाहन होता रहता है जब भी कोई कष्ट आता है तो माता उसे कष्ट को दूर से ही नष्ट कर देती है।‌ अतः आप लोगों को पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा अवश्य पढ़ना चाहिए। ‌

दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम क्या है?

जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि हिंदू धर्म में 34 कोटी देवी देवता है और किसी भी प्रकार के देवी देवता की पूजा करने के लिए विशेष प्रकार के नियम कानून और पूजा विधि बनाई गई है. जिसकी जानकारी हमें हमारे धर्म शास्त्रों और ग्रंथों से मिली है। ‌ इसी प्रकार दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए भी कुछ नियम कानून बनाए गए हैं इसके बारे में आपको नीचे बताया गया है-

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ सुथरा वस्त्र पहनकर गंगाजल से छिड़काव करके आवरण स्वच्छ करें.
  • इसके बाद दुर्गा माता की तस्वीर और पूजा सामग्री को रखकर विधिवत पूजा अर्चना करें.
  • पूजा सामग्री में माताजी के जो पसंद हो गए सब चीज रख सकते हैं इसके अलावा दुर्गा चालीसा कुमकुम, चंदन, आठी, नारियल, प्रसाद जैसे खीर और हलवा इत्यादि जरूर रखें। ‌
  • दुर्गा चालीसा को हाथ में लेकर नहीं बल्कि सामने की तरफ किसी चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर पुस्तक रखें.
  • पुस्तक को खोलकर वहीं पर ही आप लोगों को दुर्गा चालीसा बिना रुके हुए और बिना कहीं पर भी बीच में छोड़े हुए पढ़ना चाहिए।
  • पाठ करते वक्त एक बार ध्यान रखें की आपके शब्द स्पष्ट, सही और गति बहुत तेज नहीं होनी चाहिए।
  • पाठ करने के लिए हमेशा एक स्वच्छ आसन को बिछाकर उस पर स्वयं बैठ जाएं.
  • पाठ शुरू करने से पहले माता दुर्गा को और उनकी दुर्गा चालीसा को प्रणाम अवश्य करें और उनसे विनती करें कि अगर इसमें कुछ भी हमसे भूल हो जाती है तो हमें क्षमा करें और हमारी पूजा को स्वीकार करें।

दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए किस मंत्र का प्रयोग किया जाता है?

जैसा कि आप सबको पता है कि अगर हम किसी भी देवी देवता या भगवान की पूजा करने के लिए जाते हैं, तो पूजा के दौरान उनके लिए एक विशेष मंत्र सिद्ध किया जाता है। ठीक इसी प्रकार दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले ही आप लोगों को इसका एक मंत्र का उच्चारण भी करना चाहिए। ‌ यह मंत्र है- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ ! कोशिश करें कि आप लोग पाठ करते समय संस्कृत भाषा का प्रयोग करें। अगर संस्कृत नहीं हो पाता है तो आप लोग हिंदी भाषा में भी इसे कर सकते हैं। ‌